हर फैसला सरकार के खिलाफ दो, तभी कुछ लोग जज को… आखिरी दिन CJI गवई कह गए बड़ी बात

नई दिल्ली. मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस बीआर गवई ने रविवार को कई अहम बातों का जिक्र किया। उन्होंने न्यायपालिका को लेकर समाज में बनी धारणाओं पर बात की तो वहीं जजों की कामकाजी व्यवहारिकता पर भी वह खुलकर बोले। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल के दौरान कभी भी किसी मामले को लेकर सरकार की ओर से दबाव का सामना नहीं किया। जस्टिस गवई ने कहा कि अदालत में हम हर मामले को एक समान नजर से ही देखते हैं। केस की मेरिट पर फैसला होता है। इसमें यह नहीं देखा जाता कि कौन सा पक्ष इसमें शामिल है। सरकार है या फिर कोई निजी पार्टी इसका हिस्सा है।
इसके अलावा उन्होंने एक नैरेटिव को लेकर भी बात की। जस्टिस गवई ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि यदि आप हर फैसला सरकार के खिलाफ नहीं देते हैं तो फिर आप स्वतंत्र जज नहीं हैं। ऐसा सोचना सही नहीं है। वहीं कॉलेजियम में जस्टिस विपुल पंचोली के प्रमोशन वाले फैसले पर जस्टिस बीवी नागरत्ना की असहमति पर भी जस्टिस गवई ने बात की। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम में असहमति कोई बहुत अलग चीज नहीं है। ऐसा होता रहा है। उन्होंने कहा कि जस्टिस नागरत्ना की बात में यदि मेरिट होता तो कॉलेजियम के अन्य 4 जज भी उनकी बात से सहमत हो जाते। आखिर इस असहमति को प्रकाशित क्यों नहीं किया गया?
इस सवाल पर जस्टिस गवई ने कहा कि आम सहमति से ऐसा तय किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि किसी जज के चयन में असहमति और उसकी दलील को पब्लिक फोरम में रखा जाए तो फिर उस आधार पर कुछ लोग राय तैयार करते हैं। ऐसी स्थिति में पूर्वाग्रह बनते हैं, जो सही नहीं रहता। उन्होंने एक चीज को लेकर भी दुख भी जताया।
अपने कार्यकाल में एक चीज ना कर पाने का अफसोस भी जताया
उन्होंने कहा कि मुझे अफसोस है कि मेरे कार्यकाल के दौरान किसी महिला जज को सुप्रीम कोर्ट में लाने की सिफारिश नहीं हुई। वहीं जस्टिस गवई ने यह भी साफ कर दिया कि रिटायरमेंट के बाद वह कोई सरकार पद या राज्यपाल जैसी भूमिका स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं अपने गृह जिले में आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए काम करूंगा।
