दो दिन, दो फैसले: हाईकोर्ट से नौकरी मिली, रायपुर कोर्ट से जेल…

रायपुर । छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग में फूड इंस्पेक्टर के पद से बर्खास्त किए गए प्रहलाद राठौड़ को जहां हाईकोर्ट से नौकरी वापस पाने की राहत मिली, वहीं महज़ दो दिन बाद रायपुर की एक अदालत ने उन्हें अनाचार, अपहरण और मारपीट के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट का फैसला:
प्रहलाद राठौड़ को भूतपूर्व सैनिक कोटे से 30 अगस्त 2018 को फूड इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें 15 मार्च 2024 को सेवा से बर्खास्त किया गया क्योंकि पुलिस वेरिफ़िकेशन रिपोर्ट में उनके खिलाफ दो आपराधिक प्रकरण दर्ज पाए गए थे।
इस निर्णय को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सिंगल बेंच ने याचिका खारिज की, लेकिन डबल बेंच ने 3 नवंबर 2025 को फैसला देते हुए राठौड़ को नौकरी पर पुनः बहाल करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पाया कि दोनों मामले वर्ष 2002 के हैं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत उन्हें अयोग्यता से छूट प्राप्त है। साथ ही, वर्ष 2007 में लोक अदालत में समझौते के बाद मामला समाप्त हो चुका था।
रायपुर कोर्ट का फैसला:
हाईकोर्ट के आदेश के दो दिन बाद, 5 नवंबर 2025 को रायपुर की विशेष अदालत (एट्रोसिटीज) ने प्रहलाद राठौड़ को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। मामले के अनुसार, राठौड़ ने खुद को अविवाहित बताकर एक महिला — जो जिला पंचायत सदस्य थीं — से संबंध बनाए। बाद में विवाहित होने की सच्चाई सामने आने पर पीड़िता ने संबंध समाप्त कर दिए। इसके बाद आरोपी ने वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया।
31 जनवरी 2023 को आरोपी ने पीड़िता को ओयो होटल बुलाकर कथित रूप से बंधक बनाकर अनाचार किया और अगले दिन अन्य लोगों के साथ मिलकर मारपीट की।
विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज) पंकज कुमार सिन्हा ने आरोप सिद्ध पाते हुए प्रहलाद राठौड़ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा के बाद आरोपी को रायपुर जेल भेज दिया गया है।
